Monday, 10 February 2025

तू गाता चल

तू गाता चल!

अक्षर - अक्षर
मन्थर - मन्थर
गति का मुदमय मंगल-स्वन
दिक के नूपुर करते रुन झुन
नभ में नव नीरद नाद घुले
मन के शिखि पग जागा नर्तन 
     ऐ गीत मेरे तू लय-पथ चल
     बो ले तू उर-उर बीज विरल

अनघ - अमल
तरल - विरल
ओ नीरव सर के नीलकमल!
चिर समाधि में रत अविचल
पत्रों पर मुखरित मुक्ताहल
तल-ताल तरंगित हो उर्मिल
     ऐ गीत मेरे तू हो झिलमिल
     भर ले तू अन्तर्नाद विमल

रस - सागर
भर - गागर
पद-पद नव-नागर छन्द भरो!
जन-जन का गौरव शीश धरो!
स्वर-वैभव क्षण क्षण कण्ठ जगे
ऐसा नित नवल विधान करो!
      ऐ गीत मेरे तू गाता चल
      ले ले तू सप्तक साध सरल


रामनारायण सोनी
११.२.२५

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