गीत! मेरे तुम विहग वर
छ्न्द के, रस के परों पर
गीत! तुम मेरे विहग वर
नील - अम्बर
चीर - प्रस्तर
रूप लय का ढूँढ लाओ
स्वर्णपथ में दौड़ जाओ
प्रियतमा की लास्य-मय छबि में सँवर कर
देखना थोड़ा विहग वर
छ्न्द के, रस के परों पर
गीत! तुम मेरे विहग वर
अरुण - प्राची
रंग - राची
रश्मियाँ पिचकारियाँ भर
व्योम पीता सोम मन्थर
सुस्मिता के वे हास - मय अस्फुट अधर
देखना थोड़ा विहग वर
छ्न्द के, रस के परों पर
गीत! तुम मेरे विहग वर
तरु - लताएँ
स्वर - सजाएँ
वेणु से मधु रागिनी झर
गा रहे नवगीत निर्झर
कामिनी के रास - मय वे स्वरित नूपुर
देखना थोड़ा विहग वर
छ्न्द के, रस के परों पर
गीत! तुम मेरे विहग वर
रामनारायण सोनी
४.२.२५
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