आज उतरे मेघ मन पर
आज उतरे मेघ मन पर
उर धरा की तृप्ति ले कर
आज अम्बर की पलक पर झुक रहा सावन मुखर।
लोचनों में प्रीत भर कर मैं खड़ा हूँ देख प्रियवर
क्षितिज तक फैली भुजाएँ कण्ठ का मधुभार ले कर।।
तुम न आये प्यार का
मौसम युहीं ना बीत जाए।
लौट कर यह दिन कहीं फिर
आय या फिर ना आए।।
तुम प्रणय की रागिनी हो
मैं बुनूँगा गीत मधुरिम
रेशमी फर सी फुहारों का सुनो तुम साज मद्धम।
आज मन का मोर यह कर यहा है नृत्य छमछम
प्राण में सुलगी अनल जो है बढ़ाती प्यास रिमझिम।।
तुम न आये प्यार का
मौसम युहीं ना बीत जाए।
लौट कर यह दिन कहीं फिर
आय या फिर ना आए।।
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