गाले तू मन, अभंग
मैं शब्द-स्वरों का स्वन-संगम
चिर मौन गलित नीरव तरंग
उर-अम्बर का सुधि-नीलांचल
मैं तड़ित-रुचिर घन वीचि-भंग
लघु-जीवन का निस्सीम क्षितिज
प्राणों में बजती जल-तरंग
गा ले मौजों में मन, अभंग
मैं शुचि श्रुतियों का उद्गाता
गति है गंगा सी धार विरल
प्राची के रोहित अश्वों का
हिन-हिन हूँ अनुनाद विकल
लघु-दीप तमी के भुज प्रलंब
श्वासों में उमड़ी चिर उमंग
गा ले मौजों में मन, अभंग
उस बूढ़े वट की शाखा पर
तिनको का सुन्दर शीशमहल
शैशव का वैभव पाया था
भूलूँ कैसे सौभाग्य विपुल
लघु-बीन वृहद स्वर सागर में
आह्लाद गीत का अंग अंग
गा ले मौजों में मन, अभंग
रामनारायण सोनी
२ .३ . २५
अभंग और भजन पर्यायवाची हैं। अभंग शब्द दो शब्दों "अ" और "भंग" से मिलकर बना है। भंग शब्द का अर्थ है टूटा हुआ और इसके आगे अ का अर्थ है अटूट या अटूट। अब अटूट या अखण्ड क्या है? इसे कई तरीकों से देखा जा सकता है:
- अभंगों में वर्णित विषय भगवान है - सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी भगवान - कोई है जो पूरे ब्रह्मांड पर निर्बाध और अनवरत कृपा बरसाता है |
- इन अभंगों में दिए गए भक्ति सिद्धांत, सार्वभौमिक सत्य अटूट हैं। ये सनातन सत्य हैं और इस दुनिया के अंत और उसके बाद भी रहेंगे।
- अभंग हर युग में प्रासंगिक हैं। चाहे वे किसी भी काल में गाए गए हों, उनकी प्रासंगिकता बरकरार रहती है। जब भी उन्हें गाया, सुना, पढ़ा और पढ़ा जाएगा, वे सभी उम्र के भक्तों को प्रेरित करते रहेंगे।
- अभंग जो खुशी और खुशी देते हैं वह अटूट है। ये अभंग आपको स्थायी और निरंतर खुशी की ओर ले जाते हैं। मन खुशियों का भंडार बन जाता है और फिर उस खुशी का कोई अंत नहीं होता।
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