आलिंगन स्वप्नों का
स्वप्न मेरे आलिंगन करके मधुमय रस भर जाते हैं
बुझती आशा की रजनी में रजत रश्मि धर जाते हैं
इनमें से कुछ कुनमुन करते, पर कुछ शोर मचाते हैं
कुछ अलसाये और उनींदे सर गोदी रख सो जाते है
कुछ में है उल्लास अपरिमित, पर कुछ हैं सहमे सहमे
कुछ मदिरा से मदिर मदिर तो कुछ रमते अन्तःपुर में
कुछ गर्वीले कुछ चटकीले, कानाफूसी सी करते कुछ
कुछ वीणा के बुझे तार से, कुछ गाते पंचम सुर में
उनमें से कुछ स्वप्न सलोने, थोड़े से रह गये अलोने
पर चाहे जो कुछ भी होवे ये सपने मेरे अपने हैं
इनके आलिंगन में मैं तो पल पल पुलकित होता हूँ
सुख में दुःख में विरह मिलन में चिर संगी सपने हैं
रामनारायण सोनी
१५.०८.२४
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