Tuesday, 28 May 2024

बूँद से मोती बनना है

बूँद से मोती बनना है 

मैं एक बूँद ही तो हूँ 
नहीं देखता मैं नदी होने का स्वप्न 
नहीं चाहता समुन्दर का सा विस्तार 
नहीं चाहता मैं उड़ना भी 
बादल बन कर स्वच्छन्द आकाश में 
शतदल के पत्तों पर बँधा बँधा मैं 
हो तो सकता हूँ खूबसूरत
पर डरता हूँ सूरज की तपन से,
नहीं बुझाना चाहता प्यास पपीहे की 
मैं बस सीप के गर्भ में पलना चाहता हूँ 
जहाँ खो सकूँ अपनी विरलता 
चाहता हूँ उसी सीपी के गर्भ में 
मेरी साधना मौन की साधना हो जावे।
जब खुलें सीपी के अन्तर्पट 
चाहता हूँ मैं मोती बन जाऊँ

रामनारायण सोनी
५.१.२४

No comments:

Post a Comment